सौभाग्य योजना : हर घर बिजली पहुँचाने की ठोस और रचनात्मक पहल
मोदी सरकार द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था के विकास के साथ नागरिक की मूल आवश्यकताओं को केंद्रीत कर योजनाएं बनाई जा रही हैं। ये सरकार सिर्फ शहरीय विकास पर केन्द्रित नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री अपने भाषणों और कार्यक्रमों में इस बात को साफ कर चुके हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा, तभी शहरों में कुछ नए निर्माण की संभावना है।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से बनारस के विकास को मिली और रफ़्तार !
अपनी बनारस यात्रा के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस के विकास को सुनिश्चित करने की कोशिश की है। हालाँकि, नोट बंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहली बनारस यात्रा है, लेकिन समग्र रूप से यह दसवीं यात्रा है। वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री ने बनारस की 5 बार यात्रा की थी। सबसे पहले 7 नवंबर, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस गये थे। उसके बाद उन्होंने 8 नवंबर, 2014, 25 दिसंबर, 2014, 18 सितंबर,
हर घर तक बिजली पहुँचाने की दिशा में तेजी से बढ़ रही मोदी सरकार !
हर गांव तक बिजली पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के करीब पहुंची मोदी सरकार अब देश के हर घर को रोशन करने के लिए “सुभाग्य योजना” लाने जा रही है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में हर घर को 2019 तक सब्सिडी देकर बिजली कनेक्शन मुहैया कराया जाएगा। गौरतलब है कि देश के चार करोड़ घरों में अभी भी बिजली के बल्ब जलने का इंतजार है। यह संख्या यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी के कुल घरों से ज्यादा
सामाजिक-आर्थिक प्रगति को बुलेट ट्रेन से मिलेगी रफ्तार
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अहमदाबाद में मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना की आधारशिला रखी। इसके साथ ही भारत 20 देशों के एक खास समूह में शामिल हो गया। यह परियोजना लोगों के लिए सुरक्षा, गति और बेहतर सेवा के एक नये युग का सूत्रपात करेगी। माना जा रहा है कि विश्व में तीसरा सबसे लंबा नेटवर्क होने का फायदा उठाते हुए भारतीय
‘बुलेट ट्रेन का विरोध वैसे ही है, जैसे राजधानी एक्सप्रेस और मेट्रो का हुआ था’
वामपंथी सोच वाले नेता-बुद्धिजीवी भले ही उदारीकरण-भूमंडलीकरण की नीतियों का विरोध करें लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि इसने देश की तस्वीर बदल दी। कारोबारी सोच, शॉपिंग मॉल, ब्रांडेड सामान, कार, बस, बाइक के नए-नए मॉडल, हाईवे, शानदार होटल, हर हाथ में मोबाइल, चमचमाते हवाई अड्डे उदारीकरण की ही देन हैं। दुर्भाग्यवश देश की धमनी मानी जाने वाली रेल की हालत में बदलाव होना अभी बाकी
‘शौचालय क्रांति’ लाने में कामयाब रही मोदी सरकार
भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद में आकंठ डूबी और जाति-धर्म की राजनीति करने वाली कांग्रेसी सरकारों ने साफ-सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेकारी जैसी जमीनी समस्याओं की ओर बहुत कम ध्यान दिया। दूसरे शब्दों में कांग्रेसी सरकारें सत्ता की राजनीति से आगे नहीं बढ़ पाईं। इसका नतीजा यह हुआ कि अपने नागरिकों को स्वच्छता की सुविधाएं मुहैया कराने में भारत पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका से ही नहीं युद्ध गस्त देश
गाय के ‘अर्थशास्त्र’ को समझने की जरूरत
भारतीय संदर्भ में देखें तो गाय को लेकर जितना विवाद होता है उतना शायद ही किसी पशु को लेकर होता हो। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि गाय के संरक्षण-संवर्द्धन को लेकर जो प्रावधान किए जाते हैं, उन्हें देश के तथाकथित सेकुलर खेमे द्वारा धार्मिक और वोट बैंक के नजरिए से देखा जाने लगता है। इस विवाद का सबसे दुखद पहलू यह है कि हम गाय के आर्थिक महत्व को भुला देते हैं। जिस दिन हम गाय के अर्थशास्त्र को
अपने लक्ष्यों की तरफ अग्रसर है नोटबंदी, विफलता की बातें हैं भ्रामक
पिछले साल की गई नोटबंदी के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। रिजर्व बैंक ने इसी सप्ताह एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि जब नोटबंदी की गई थी तो जिन पांच सौ व हजार रूपये के नोटों को बंद किया गया था, उनका मूल्य 15.28 लाख करोड़ रुपए था। इस राशि का करीब 99 प्रतिशत हिस्सा बैंकिंग सिस्टम में वापस आ चुका है। इन पुराने नोटों में से महज 16 हजार नोट ही आना शेष हैं। प्रधानमंत्री
नोटबंदी से हुए फायदों की कहानी, इन आंकड़ों की जुबानी
आठ अगस्त को नोटबंदी के 9 महीने हो गये। आज बड़े मूल्य वर्ग के चलन से बाहर की गई मुद्राओं के बदले छापी गई नई मुद्रायेँ 84% चलन में है, जबकि नोटबंदी के पहले बड़े मूल्यवर्ग यथा 1000 और 500 की मुद्रायेँ 86% चलन में थी। फिलवक्त, चलन में मुद्राओं का केवल 5.4% ही बैंकों के पास उपलब्ध है, जबकि नवंबर, 2016 में बैंकों के पास 23.2% मुद्रायेँ उपलब्ध थी। नोटबंदी के तुरंत बाद बैंकों में नकदी की उपलब्धता उसकी
ये मुसलमानों का तुष्टिकरण करने वाली नहीं, उनके समग्र विकास के लिए काम करने वाली सरकार है !
भले ही उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी अपने सेवाकाल के आखिरी दिन मुसलमानों में असुरक्षा और घबराहट की भावना की बात कही हो, लेकिन स्वयंभू गोरक्षकों की छिटपुट गतिविधियों को छोड़ दिया जाए तो पूरे देश में अमन-चैन कायम है। 2014 के लोक सभा चुनाव के पहले विरोधी नेताओं ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ जिस प्रकार का नकारात्मक माहौल बनाया था, वह निर्मूल साबित हुआ। सत्ता में आने के बाद से ही मोदी